विशेषज्ञ डॉक्टरों को सरकारी अस्पतालों में रोकने के लिए क्या है सरकार की नई रणनीति?
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि स्वास्थ्य और शिक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। बीते साढ़े तीन वर्षों के दौरान सरकार ने दोनों क्षेत्रों में व्यापक सुधारों की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ट्रेक्ट और जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसर के वेतन में की गई यह बढ़ोतरी स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाएगी तथा प्रदेश के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एक ओर स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार कर रही है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सकों एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की कमी को दूर करने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन प्रयासों से प्रदेश के लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जा सकेेंगी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कॉन्ट्रेक्ट और जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसर (स्पेशलिस्ट) के मासिक वेतन में 78 प्रतिशत ऐतिहासिक बढ़ोतरी की स्वीकृति प्रदान की है। इस निर्णय के तहत जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसर का मासिक वेतन 33,660 रुपये से बढ़ाकर सीधे 60,000 रुपये कर दिया गया है।
इससे पहले वर्ष 2022 में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद जॉब ट्रेनी मेडिकल ऑफिसर (स्पेशलिस्ट) का वेतन लगभग 27,000 रुपये से बढ़ाकर 33,660 रुपये किया गया था, जो लगभग 24 प्रतिशत की वृद्धि थी। वर्तमान प्रदेश सरकार ने उनके वेतन में सीधे 78 प्रतिशत की वृद्धि की है। इससे विशेषज्ञ चिकित्सकों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा तथा प्रदेश के दूर-दराज क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है, ताकि लोगों को अपने घर-द्वार के पास ही बेहतर उपचार और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें तथा इलाज के लिए प्रदेश से बाहर जाने की आवश्यकता न पड़े।
मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने इससे पूर्व मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों का मासिक स्टाइपेंड भी बढ़ाया था। प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों का स्टाइपेंड 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये, द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों का 45 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये तथा तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों का 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 65 हजार रुपये किया गया था। मेडिकल कॉलेजों में पीजी विद्यार्थी अपनी पढ़ाई के साथ-साथ मरीजों के उपचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी जिम्मेदारियों को देखते हुए राज्य सरकार ने उनके स्टाइपेंड में यह बढ़ोतरी की, ताकि वह बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित हो सकें।
सीनियर रेजिडेंट और अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों का स्टाइपेंड 170 प्रतिशत बढाया
मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट और अन्य विशेषज्ञ चिकित्सकों की अहम भूमिका को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने उनके मासिक स्टाइपेंड में 50 प्रतिशत से 170 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर स्पेशलिस्ट का मासिक स्टाइपेंड 60,000-65,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दिया गया था तथा सुपर स्पेशलिस्ट तथा सीनियर रेजिडेंट (सुपर स्पेशलिस्ट) का मासिक स्टाइपेंड 60,000-65,000 रुपये से बढ़ाकर 1.30 लाख रुपये किया गया था।
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