Echo

HP FUTURES: UNESCO के सहयोग से स्कूलों में कौशल-आधारित शिक्षा को कक्षा तक पहुंचाने की पहल


प्रदेश सरकार UNESCO के सहयोग से स्कूलों में HP FUTURES (Foundation for Upskilling, Teacher Excellence, Understanding, Readiness, Equity and Sustainability) कार्यक्रम लागू कर रही है। समग्र शिक्षा इस कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए कदम उठा रहा है। HP FUTURES कार्यक्रम के तहत कौशल-आधारित शिक्षा (Competency-Based Education - CBE) को स्कूलों में प्रभावी तरीके से  लागू करने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी कड़ी में शिमला में एक तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गा। इसमें शिमला, सोलन, सिरमौर, किन्नौर, बिलासपुर और हमीरपुर जिलों के 18 शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यशाला में मेलबर्न विश्वविद्यालय की प्रो. एस्थर केयर और अमेरिका से सुश्री हेलेन प्रमुख रिसोर्स पर्सन के तौर पर शामिल हुईं। 
 


रोजमर्रा की कक्षा गतिविधियों से कौशल विकास पर शिक्षकों का फोकस
कार्यशाला में शिक्षकों ने कौशल-आधारित शिक्षा की समझ को कक्षा के रोजमर्रा के शिक्षण-अधिगम में प्रभावी रूप से लागू करने के तरीके सीखे। उन्होंने जाना कि कक्षा गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आलोचनात्मक सोच, संवाद, सहयोग, रचनात्मकता और समस्या समाधान जैसे कौशलों का सुनियोजित विकास किया जा सकता है।  यही नहीं शिक्षकों ने मिलकर पाठ योजनाओं और कक्षा गतिविधियों में भी बदलाव किए, ताकि बच्चों को सोचने, चर्चा करने, समस्याओं का समाधान खोजने, अपने विचार व्यक्त करने, साथ मिलकर काम करने और सीखी गई बातों को व्यवहार में लाने के अधिक अवसर मिलें। प्रशिक्षण के बाद संबंधित स्कूलों में इन तरीकों के कक्षा में इस्तेमाल का भी अवलोकन किया जा रहा है। इस तरह प्रशिक्षण और उसके बाद कक्षा में इसके प्रयोग, दोनों स्तरों पर प्रगति को समझते हुए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि कार्यक्रम प्रभावी ढंग से लागू हो।
 
 
प्रशिक्षण के बाद कक्षाओं में दिख रहा सीखने के तरीकों में बदलाव
शिक्षकों ने कार्यशाला के अनुभव को उपयोगी बताते हुए कहा कि अब वे पाठ योजनाएं तैयार करते समय इस बात का विशेष ध्यान रख रहे हैं कि बच्चों में किन कौशलों को विकसित करना है और इसके लिए कौन-से तरीके अपनाए जा सकते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। उनका कहना है कि इन तरीकों को कक्षा में अपनाने से बच्चों के लिए सीखना अधिक रुचिकर और उपयोगी बनाया जा सकता है। प्रमुख प्रशिक्षक के तौर पर कार्यशाला में शामिल मेलबर्न विश्वविद्यालय की प्रो. एस्थर केयर ने कहा कि प्रशिक्षण के बाद शिक्षक बच्चों को कक्षा में अधिक सक्रिय रूप से भाग लेने के अवसर दे रहे हैं। अब इस बात पर भी ध्यान दिया जा रहा है कि बच्चे किस तरह सीख रहे हैं और शिक्षक उनके सीखने के आधार पर किस तरह आगे बढ़ रहे हैं।
इससे पहले एक कार्यशाला अगस्त माह में आयोजित की गई थी। अब इसी तरह की तीसरी कार्यशाला नवंबर में आयोजित की जाएगी। इसके बाद दिसंबर से प्रदेश के बाकी छह जिलों के चयनित स्कूलों के शिक्षकों के लए भी इसी तरह की कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा।  पायलट स्तर पर मिली सीख और अनुभवों के आधार पर इस मॉडल को पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकेगा।
 
 
HP FUTURES के तहत CBE, ग्रीनिंग एजुकेशन और मूल्य शिक्षा को बढ़ावा
हिमाचल सरकार ने UNESCO के साथ HP FUTURES कार्यक्रम को लेकर एमओयू कर रखा है। इसके तहत स्कूलों में कौशल-आधारित शिक्षा (Competency-Based Education - CBE) को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, सहयोग और संचार जैसी क्षमताओं का विकास हो सके। पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए ग्रीनिंग एजुकेशन को भी स्कूलों में लागू किया गया है। इसके अलावा, खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों में मूल्य शिक्षा को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।


Share:
Share:
Comment
Leave A Comment