समग्र शिक्षा की पुस्तकालय प्रबंधन एवं पठन गतिविधियों पर दो दिवसीय मास्टर ट्रेनर्स कार्यशाला आयोजित
सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में पुस्तकालयों के प्रभावी संचालन और बच्चों में पढ़ने की नियमित आदत विकसित करने के उद्देश्य से समग्र शिक्षा के तहत जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), शामलाघाट, शिमला में पुस्तकालय प्रबंधन एवं पठन गतिविधियों पर दो दिवसीय जिलास्तरीय मास्टर ट्रेनर्स (MTs) कार्यशाला आयोजित की गई। समग्र शिक्षा एवं रूम टू रीड संस्था के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में जिले के सभी 21 शिक्षा खंडों से तीन-तीन मास्टर ट्रेनर्स सहित कुल 63 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का शुभारंभ जिला समन्वयक डॉ. संजीव कुमार शर्मा एवं चंद्रकांता, प्रवक्ता, डाइट शिमला द्वारा किया गया। इस दौरान उन्होंने प्रशिक्षण के उद्देश्यों और विद्यालयों में पुस्तकालयों की भूमिका पर प्रकाश डाला। डॉ. संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि सुव्यवस्थित एवं सक्रिय पुस्तकालय बच्चों में पढ़ने की रुचि विकसित करने के साथ उनकी रचनात्मकता, भाषा कौशल और ज्ञान अर्जित करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है।
प्रशिक्षण के पहले दिन प्रतिभागियों को 'पढ़ना क्या है?', 'बच्चे पढ़ना कैसे सीखते हैं?' और प्रारंभिक कक्षाओं में गुणवत्तापूर्ण बाल साहित्य की आवश्यकता जैसे विषयों पर जानकारी दी गई। इसके साथ ही बाल-मित्र पुस्तकालय की अवधारणा एवं उसके विभिन्न स्वरूपों, बाल पुस्तकालय प्रबंधन समिति (CLMC – Children’s Library Management Committee), पुस्तक संग्रह (IBC – Ideal Book Collection) की प्रक्रिया तथा पुस्तक स्तरीकरण (Book Levelling) पर चर्चा की गई।
दूसरे दिन विद्यालय पुस्तकालयों में आयोजित होने वाली प्रमुख पठन गतिविधियों मुखर वाचन (Read Aloud), सहपठन (Shared Reading), जोड़ों में पठन (Pair Reading) एवं स्वतंत्र पठन (Independent Reading) के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को पठन उपरांत विस्तारित गतिविधियों, पुस्तक लेन-देन प्रक्रिया (CICO – Check In–Check Out) और विद्यालय स्तर पर रिकॉर्ड संधारण के तरीकों से भी अवगत करवाया गया।
प्रशिक्षण में पुस्तकालय संचालन में अभिभावकों एवं समुदाय की भागीदारी, शिक्षक की स्वयं एक पाठक के रूप में भूमिका, लाइब्रेरी रेटिंग सिस्टम (LRS) तथा डिजिटल नज (Digital Nudges) की अवधारणा और इनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
बाल-केंद्रित पठन तकनीकों से बच्चों में पढ़ने की रुचि विकसित करने पर जोर
कार्यशाला में प्रतिभागियों को बच्चों की पठन क्षमता एवं स्तर के अनुरूप कहानी की पुस्तकें उपलब्ध करवाने और उन्हें स्वेच्छा से पढ़ने के लिए प्रेरित करने वाली प्रभावी एवं बाल-केंद्रित तकनीकों से परिचित कराया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को अपनी रुचि के अनुसार पुस्तकें चुनने, पढ़ने और पुस्तकालय से नियमित रूप से जुड़ने के अवसर उपलब्ध करवाने पर जोर दिया गया।
इस कार्यशाला में जिला समन्वयक डॉ. संजीव कुमार शर्मा एवं रूम टू रीड संस्था से दीपक कनियाल ने रिसोर्स पर्सन के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से पुस्तकालय प्रबंधन और पठन गतिविधियों के प्रभावी संचालन से जुड़ी जानकारी साझा की।
कार्यशाला के बाद सभी 21 शिक्षा खंडों के प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने खंडों के प्रत्येक सरकारी प्राथमिक विद्यालय से एक शिक्षक को पुस्तकालय प्रबंधन एवं पठन गतिविधियों पर प्रशिक्षित करेंगे। इस पहल के माध्यम से प्रशिक्षण को जिले के सभी सरकारी प्राथमिक विद्यालयों तक पहुंचाने और पुस्तकालयों को अधिक सक्रिय बनाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही बच्चों में पढ़ने की नियमित आदत, पुस्तकों के प्रति रुचि और समृद्ध पठन संस्कृति विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।
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