प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल को बड़ी जिम्मेदारी, सरदार दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति बने
हिमाचल प्रदेश के प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद् और प्राकृतिक खेती के प्रबल समर्थक प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने गुजरात के बनासकांठा जिले स्थित सरदार कृषिनगर दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय, गुजरात ( Sardarkrushinagar Dantiwada Agricultural University) के कुलपति (Vice Chancellor) का कार्यभार संभाल लिया है। उनकी नियुक्ति न केवल हिमाचल प्रदेश बल्कि देशभर के कृषि एवं शिक्षा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। कृषि, डेयरी विज्ञान, पशु चिकित्सा विज्ञान, कृषि अभियांत्रिकी तथा कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में अग्रणी संस्थानों में शामिल सरदार कृषि दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय उत्तर गुजरात के कृषि विकास का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की कमान हिमाचल के एक शिक्षाविद् को मिलना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
उत्तर गुजरात के कृषि विकास का प्रमुख केंद्र है दांतीवाड़ा विश्वविद्यालय
सरदार कृषि दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय गुजरात के शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों की कृषि चुनौतियों पर केंद्रित अनुसंधान और नवाचार के लिए जाना जाता है। विश्वविद्यालय के अधीन कृषि, बागवानी, डेयरी, पशु चिकित्सा, मत्स्य पालन तथा कृषि अभियांत्रिकी से जुड़े अनेक महाविद्यालय और अनुसंधान केंद्र कार्यरत हैं। गुजरात के लाखों किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों, उन्नत कृषि पद्धतियों और नवाचारों को पहुंचाने में यह विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार सेवाओं के क्षेत्र में इसकी राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान है।
शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार का लंबा अनुभव
प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल इससे पहले Dr. Yashwant Singh Parmar University of Horticulture and Forestry (नौणी विश्वविद्यालय) के कुलपति के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। शिक्षा, अनुसंधान, कृषि नवाचार और संस्थागत नेतृत्व का उनका व्यापक अनुभव उनकी नई जिम्मेदारी में महत्वपूर्ण साबित होगा। उनकी नियुक्ति विश्वविद्यालय को नई दिशा देने और कृषि अनुसंधान तथा किसानोन्मुखी कार्यक्रमों को और अधिक सशक्त बनाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्राकृतिक खेती को नई पहचान दिलाने में निभाई अग्रणी भूमिका
प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के कार्यकारी निदेशक भी रह चुके हैं। प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण की प्रक्रिया में शामिल करवाने के लिए उन्होंने नीति आयोग के साथ मिलकर महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके नेतृत्व में प्राकृतिक खेती को हिमाचल प्रदेश की सभी पंचायतों तक पहुंचाने का व्यापक अभियान चलाया गया। किसानों के बीच उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें "पहाड़ी पालेकर" के नाम से भी संबोधित किया जाता है।
प्रो. चंदेल दो दर्जन से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं। उनके 200 से अधिक शोध-पत्र और लगभग दो दर्जन परियोजना रिपोर्ट प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न राष्ट्रीय समाचार पत्रों और प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में उनके लेख नियमित रूप से प्रकाशित होते रहे हैं।
कई महत्वपूर्ण पदों पर दे चुके हैं सेवाएं
शिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में ढाई दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के घुमारवीं क्षेत्र से संबंध रखते हैं। उन्होंने Chaudhary Sarwan Kumar Himachal Pradesh Krishi Vishvavidyalaya से स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की तथा नौणी विश्वविद्यालय से कीट विज्ञान (एंटोमोलॉजी) में पीएचडी की उपाधि हासिल की। कृषि एवं वानिकी शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने जर्मनी से विशेष अध्ययन भी किया है। अपने करियर की शुरुआत रिसर्च फेलो के रूप में करने वाले प्रो. चंदेल नौणी विश्वविद्यालय में संयुक्त निदेशक अनुसंधान, वरिष्ठ वैज्ञानिक (कीट विज्ञान) तथा प्रिंसिपल रेजिड्यू एनालिस्ट जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं।
कृषि और बागवानी अनुसंधान में उल्लेखनीय योगदान
प्रो. चंदेल ने शुष्क क्षेत्रों में सेब के परागण, हर्बल शहद उत्पादन, पिस्ता उत्पादन में वृद्धि, सेब में रस्टिंग की समस्या सहित अनेक विषयों पर महत्वपूर्ण शोध कार्य किए हैं। वे देश और विदेश की प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा पोषित कई अनुसंधान परियोजनाओं के प्रमुख अन्वेषक तथा विशेषज्ञ टीमों के सदस्य रहे हैं।
इसके अलावा वे अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं के संपादक और संपादकीय बोर्ड के सदस्य भी रह चुके हैं। कृषि, बागवानी, अनुसंधान, शिक्षण और किसान कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा अनेक सम्मान और पुरस्कार प्रदान किए जा चुके हैं। प्रो. चंदेल देश और विदेश में आयोजित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और सेमिनारों में मुख्य वक्ता के रूप में भी अपने विचार रख चुके हैं। उनकी नियुक्ति को कृषि शिक्षा, अनुसंधान, प्राकृतिक खेती और किसान-केंद्रित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे सरदार कृषि दांतीवाड़ा कृषि विश्वविद्यालय को नई ऊर्जा और व्यापक दृष्टि मिलने की उम्मीद है।
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