SEE Learning से बदलेंगे शिक्षा के मायने: प्रिंसिपल्स और शिक्षकों को दी खास ट्रेनिंग
हिमाचल प्रदेश में स्कूली बच्चों को भावनात्मक और मानसिक तौर पर सुदृढ़ करने की दिशा में समग्र शिक्षा ने एक बड़ा कदम उठाया है। समग्र शिक्षा ने इसके लिए पीरामल फाउंडेशन के साथ करार कर SEE (Social, Emotional and Ethical) Learning कार्यक्रम स्कूलों में लागू किया है। वर्तमान में इस कार्यक्रम को कई स्कूलों में प्रभावी तरीके से चलाया जा रहा है और अब इसको व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। इसी कड़ी में रिकांगपिओ में तीन दिवसीय 'SEE Learning Educators’ Workshop' का आयोजन किया गया। समग्र शिक्षा, पीरामल फाउंडेशन, एमोरी यूनिवर्सिटी (यूएसए) और छोस खोर लिंग बौद्ध सेवा संघ (किन्नौर) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में सरकारी और निजी स्कूलों के 60 प्रधानाचार्य, शिक्षक और डाइट (DIET) के ट्रेनी शिक्षकों ने हिस्सा लिया। इस कार्यशाला के जरिए शिक्षकों को SEE Learning की अवधारणा, इसके व्यावहारिक पहलुओं और स्कूली शिक्षा में इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रशिक्षित किया गया। पीरामल फाउंडेशन और एमोरी यूनिवर्सिटी से आए विशेषज्ञों ने इस दौरान शिक्षकों का मार्गदर्शन किया।
आधुनिक शिक्षा में करुणा और नैतिक मूल्यों का समावेशः प्रो. समधोंग रिनपोछे
कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद प्रो. समधोंग रिनपोछे ने कहा कि SEE Learning प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा से प्रेरित है, जिसे परम पावन धर्मगुरू दलाई लामा विश्वभर में प्रसारित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में इस ज्ञान को समाहित करने के प्रति धर्मगुरू दलाई लामा विशेष रूप से प्रतिबद्ध हैं और यह कार्यक्रम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
एमोरी यूनिवर्सिटी के 'सेंटर फॉर कंटेंप्लेटिव साइंस एंड कंपैशन-बेस्ड एथिक्स' के कार्यकारी निदेशक डॉ. लोबसांग तेनजिन नेगी ने कहा कि हिमाचल वह पावन भूमि है जहाँ धर्मगुरू दलाई लामा निवास करते हैं। ऐसे में यहाँ SEE Learning को प्रभावी रूप से लागू करना उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का एक माध्यम भी है। यह कार्यक्रम समाज में करुणा, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने में अत्यंत उपयोगी साबित होगा। किन्नौर के उपायुक्त अमित शर्मा ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के दौर में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, भावनात्मक संतुलन और नैतिक दृष्टिकोण को सशक्त बनाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की अत्यंत आवश्यकता है।
इस साल SEE Learning कार्यक्रम के लिए 50 लाख रुपये का बजट स्वीकृत
समग्र शिक्षा की राज्य नोडल अधिकारी वर्षा सूद ने कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति साझा करते हुए बताया कि समग्र शिक्षा इसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ लागू कर रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष SEE Learning के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए लगभग 50 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। वर्तमान पीढ़ी को जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनाने के लिए यह पहल बेहद जरूरी है।
पीरामल फाउंडेशन के निदेशक ईशान शर्मा ने बताया कि फाउंडेशन वर्तमान में देश के सात राज्यों में SEE Learning पर काम कर रहा है और इसे बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। कार्यशाला में डॉ. लोबसांग तेनजिन नेगी, कार्यकारी निदेशक, Center for Contemplative Science and Compassion-Based Ethics, Emory University; ईशान शर्मा, निदेशक, पिरामल फाउंडेशन; युकी इमोटो, निदेशक सीबीसीटी और SEE learning जापान ग्याबुंग टुल्कु रिन्पोछे; निदेशक, छोस खोर लिंग कुलदीप नेगी, प्रधानाचार्य, DIET किन्नौर; सुशील शर्मा, उपनिदेशक, उच्च शिक्षा; समग्र शिक्षा की कोर्डिनेटर वर्षा सूद एवं रंजना चौहान; राजेंद्र ठाकुर, कार्यक्रम प्रबन्धक, पिरामल फाउंडेशन तथा डॉ. तेनजिन नीमा नेगी संयोजक, छोस खोर लिंग सेवा संघ किन्नौर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। तीन दिवसीय यह कार्यशाला शिक्षकों को सामाजिक, भावनात्मक और नैतिक दक्षताओं को स्कूली शिक्षण में शामिल करने की समझ, दृष्टिकोण और व्यावहारिक कौशल प्रदान करेगी। इससे शिक्षा को और अधिक संवेदनशील, मानवीय, करुणामय और समग्र बनाया जा सकेगा।
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