RDG बंदः कर्मचारियों के डीए, एरियर पर संकट, खाली पदों को भरना मुश्किल- वित्त विभाग
हिमाचल की वित्तीय स्थिति तथा राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) की समाप्ति के प्रभावों पर वित्त विभाग द्वारा आज एक प्रस्तुति मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, मंत्रीगण, विधायकगण, प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, प्रदेश मीडिया सहित अन्य गणमान्य लोगों के समक्ष दी गई। इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा 16वें वित्त आयोग के तहत हिमाचल को मिलने वाले वित्तीय अनुदान घाटा बंद करने से हिमाचल में गंभीर आर्थिक संकट हो जाएगा। हालात यह है कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों के लंबित डीए और एरियर का भुगतान भी नहीं कर पाएगी। विभागों में खाली पड़े पदों को भरना भी मुश्किल होगा। वित्त विभाग ने कर्मचारियों के लिए ओपीएस की जगह यूपीएस लागू करने की भी सिफारिश की है। सब्सिडी को खत्म करने. कई अहम स्कीमों को भी बंद करने की नौबत आएगी।
हिमाचल की अर्थव्यवस्था और आगामी बजट पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा
प्रस्तुति के बाद मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट का राज्य की अर्थव्यवस्था और आगामी बजट पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘आरडीजी की समाप्ति किसी सरकार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राज्य की जनता के अधिकारों के हनन से जुड़ा विषय है। हम इस मामले को लेकर भाजपा सांसदों और विधायकों के साथ दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री से मिलने को तैयार हैं। यदि एक बार आरडीजी का प्रावधान समाप्त किया जाता है, तो राज्य की जनता के अधिकारों को सुरक्षित रख पाना कठिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रस्तुति में शामिल होने के लिए भाजपा विधायकों को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश वे नहीं आए। उन्होंने कहा कि 17 राज्यों के लिए आरडीजी समाप्त कर दी गई है, लेकिन हिमाचल प्रदेश पर इसका सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है क्योंकि राज्य के बजट का 12.7 प्रतिशत हिस्सा आरडीजी से आता है, देश में दूसरा सबसे अधिक आरडीजी का हिस्सा हिमाचल को मिलता है।
जीएसटी लागू होने के बाद कर संग्रह की दर में पांच से छह फीसदी की गिरावट
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद कर संग्रह की दर घटकर लगभग 8 प्रतिशत रह गई है, जबकि पूर्व में यह 13 से 14 प्रतिशत थी। हिमाचल प्रदेश एक उत्पादक राज्य है जबकि जीएसटी उपभोग आधारित कर है, इसलिए इससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। राज्य की जनसंख्या 75 लाख है। उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद कर लगाने की क्षमता भी राज्य से छीन ली गई है। उन्होंने कहा, ‘हम सभी को मिलकर प्रदेश के हितों के लिए लड़ाई लड़नी होगी। जिन बिजली परियोजनाओं ने पूरा ऋण चुका दिया है, केंद्र सरकार को ऐसी परियोजनाओं पर कम से कम 50 प्रतिशत रॉयल्टी सुनिश्चित करनी चाहिए इसके अलावा जिन परियोजनाओं के संचालन के 40 वर्ष पूरे हो चुके हैं, उन्हें राज्य को वापस लौटाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2012 से अब तक भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के 4500 करोड़ रुपये की बकाया राशि राज्य को नहीं मिली है, जबकि इस संबंध में सुप्रोम कोर्ट का फैसला भी आ चुका है। उन्होंने कहा कि शानन पावर प्रोजेक्ट की लीज अवधि समाप्त हो चुकी है और इसे पंजाब सरकार से वापस लेने के लिए राज्य कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
अपने हकों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मैं प्रदेशवासियों को आश्वासन देता हूं कि लोगों के लिए कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लागू किया जाएगा, राज्य के संसाधनों में वृद्धि करने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।’ उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट के प्रभाव पर मंत्रिमंडल के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी गई थी और इस पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उन्होंने कहा कि वित्त विभाग ने स्थिति से निपटने के लिए केवल सुझाव प्रस्तुत किए हैं और इस पर अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल द्वारा लिया जाएगा।
आरडीजी का मुद्दा मुख्यमंत्री ने कई बार केंद्र के सामने रखा
प्रस्तुति के दौरान राज्य के लिए आरडीजी के महत्व को रेखांकित किया गया। वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर कई बार वित्त आयोग के अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात की है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत आरडीजी का प्रावधान किया गया है और यह 15वें वित्त आयोग तक राज्य को मिलता रहा है।
उन्होंने बताया कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार वित्त आयोग राज्यों की राजस्व और व्यय का आकलन करता है। वर्ष 2021 से 2026 के लिए राज्य की आय 90,760 करोड़ रुपये और व्यय 1,70,930 करोड़ रुपये आंका गया था। 80,170 करोड़ रुपये के घाटे की पूर्ति 35,064 करोड़ रुपये टैक्स डिवॉल्यूशन, 37,199 करोड़ रुपये आरडीजी और 9,714 करोड़ रुपये अन्य अनुदानों से की गई। 16वें वित्त आयोग ने किसी भी राज्य की आय और व्यय का अलग से आकलन नहीं किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य की अपनी आय लगभग 18,000 करोड़ रुपये है, जबकि प्रतिबद्ध व्यय लगभग 48,000 करोड़ रुपये है, जिसमें वेतन, पेंशन, ऋण का ब्याज और मूलधन, सब्सिडी, सामाजिक सुरक्षा पेंशन इत्यादि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में राज्य को लगभग 13,950 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है। इसके अतिरिक्त 10,000 करोड़ रुपये के ऋण की सीमा को जोड़कर उपलब्ध संसाधनों से लगभग 42,000 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। आरडीजी समाप्त होने के कारण बजटीय प्रावधानों को पूरा करने में गंभीर संसाधन संकट उत्पन्न हो गया है।
विकार्य कार्य बंद करने, देनदारियां न देने पर भी 6000 करोड़ का राजस्व घाटा रहेगा
वित्त सचिव ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास कार्यों, लंबित देनदारियों और राज्य योजनाओं को छोड़कर लगभग 6,000 करोड़ रुपये का संसाधन अंतर है। राजस्व बढ़ाने और व्यय घटाने के सुझाव तुरंत या कम अवधि में लागू नहीं किए जा सकते। इन सुधारों के बाद भी संसाधन अंतर बना रहेगा और आरडीजी इस अंतर को पाटने में सहायक रही है।
इसी कारण हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों को विशेष श्रेणी का दर्जा दिया गया था। हिमाचल प्रदेश का गठन जनता की आकांक्षाओं के आधार पर हुआ था, न कि एक वित्तीय रूप से सक्षम इकाई के रूप में। इन सिफारिशों का प्रभाव केवल वर्तमान सरकार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाली सरकारों पर भी पड़ेगा और यह राज्य की जनता के साथ गंभीर अन्याय होगा।
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