युवाओं की भागीदारी से टीबी के खिलाफ मजबूत होगी लड़ाई, शिमला में JOSH टीमें लॉन्च
टीबी के खिलाफ जनभागीदारी को मजबूत करने और युवाओं को इस अभियान से जोड़ने के लिए शिमला में आज JOSH (Joint Squad for Health) टीमों की शुरुआत की गई। जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से यह कार्यक्रम जिला प्रशिक्षण केंद्र, डीडीयूजेडएच, शिमला में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ शिमला शहरी के विधायक हरीश जनारथा ने किया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ टीबी चैंपियंस, युवा प्रतिनिधि, एनसीसी कैडेट्स, एनएसएस स्वयंसेवी और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विभिन्न सहयोगी शामिल हुए।
शिमला में टीबी के मामलों में आई कमी
कार्यक्रम के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी शिमला डॉ. यशपाल रांटा ने टीबी की स्थिति और इसकी रोकथाम में समुदाय की भूमिका के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत में वर्ष 2025 में करीब 26.1 लाख नए टीबी मामले सामने आए, जबकि हिमाचल प्रदेश में 14,916 नए मामले दर्ज किए गए। शिमला जिले में टीबी के मामलों में लगातार कमी आई है। वर्ष 2022 में जिले में 1,794 मामले सामने आए थे, जो वर्ष 2026 में घटकर 1,450 रह गए। वर्ष 2025 में जिले की कुल 412 पंचायतों में से 141 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया।
युवा बनेंगे टीबी के खिलाफ जागरूकता के दूत
JOSH टीमों के जरिए युवाओं, सामुदायिक स्वयंसेवकों और विभिन्न संगठनों को टीबी के खिलाफ अभियान से जोड़ा जाएगा। ये टीमें लोगों को टीबी के लक्षणों के बारे में जागरूक करने, संभावित मरीजों को समय पर जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने, इलाज पूरा करने के लिए प्रेरित करने और बीमारी से जुड़े भेदभाव को कम करने में मदद करेंगी।
205 स्क्रीनिंग कैंप, AI तकनीक से भी होगी जांच
जिला टीबी अधिकारी डॉ. विनीत लखनपाल ने बताया कि इस वर्ष गांवों और वार्ड स्तर पर 205 टीबी स्क्रीनिंग कैंप लगाए जा चुके हैं। टीबी की जल्द पहचान के लिए AI आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे तकनीक का इस्तेमाल भी शुरू किया जा रहा है। इससे खासकर दूरदराज और कठिन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जांच को आसान बनाने में मदद मिलेगी।
312 टीबी चैंपियंस लोगों को कर रहे जागरूक
टीबी से सफलतापूर्वक ठीक हो चुके लोगों को टीबी चैंपियन/टीबी विजेता के रूप में अभियान से जोड़ा गया है। जिले में अब तक 312 टीबी चैंपियंस को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। कार्यक्रम में ‘मेरी टीबी की कहानी’ के तहत दो टीबी चैंपियंस ने अपने अनुभव साझा किए और लोगों को समय पर जांच करवाने तथा इलाज का पूरा कोर्स करने का संदेश दिया। इस अवसर पर एनसीसी कैडेट्स, युवा अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों, एनएसएस स्वयंसेवियों, स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े सहयोगियों और टीबी चैंपियंस को टीबी जागरूकता एवं सामुदायिक गतिविधियों में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
टीबी मुक्त शिमला के लिए युवाओं से आगे आने का आह्वान
शिमला शहरी के विधायक हरीश जनारथा ने टीबी के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न संगठनों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि टीबी को खत्म करने के लिए युवाओं, शिक्षण संस्थानों, सामुदायिक संगठनों और समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने नई JOSH टीमों से टीबी मुक्त भारत अभियान के संदेश को लोगों तक पहुंचाने, टीबी के लक्षण वाले लोगों को जांच के लिए प्रेरित करने और समय पर इलाज शुरू करवाने में सहयोग करने का आह्वान किया।
जिला स्वास्थ्य विभाग ने टीबी के खिलाफ लोगों की भागीदारी को और मजबूत करते हुए युवाओं, टीबी चैंपियंस, स्थानीय संस्थाओं, सामुदायिक संगठनों और स्वास्थ्य सहयोगियों के साथ मिलकर टीबी मुक्त शिमला और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
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