Echo

सरकारी कर्मचारी भर्ती और सेवा शर्तें विधेयक पर सुप्रीम कोर्ट से हिमाचल सरकार को झटका, हाईकोर्ट का फैसला बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार को बड़ा झटका देते हुए हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सरकारी कर्मचारी सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 से जुड़े मामले में राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें इस अधिनियम को असंवैधानिक घोषित करते हुए निरस्त कर दिया गया था।
राज्य सरकार ने 25 अप्रैल 2026 के हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। बुधवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद सरकार की याचिका खारिज कर दी।
इस फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सरकारी कर्मचारी सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 प्रभावहीन हो गया है। अब अनुबंध कर्मचारियों को उनकी जॉइनिंग तिथि से वित्तीय लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।


कॉलेज कैडर के कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट में रखा अपना पक्ष

हिमाचल प्रदेश कॉलेज कैडर के कर्मचारियों ने देवेंद्र कुमार बनाम राज्य सरकार व अन्य के मामले  में सुप्रीम कोर्ट में कैवियेट दायर की थी। कर्मचारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान और अधिवक्ता शिवम पराशर ने पैरवी की। हिमाचल प्रदेश कॉलेज कैडर के 65 कर्मचारियों ने कैवियेट दायर कर अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा था। कर्मचारियों ने फैसले का स्वागत करते हुए राज्य सरकार से आग्रह किया है कि कर्मचारियों को अनुबंध अवधि के लंबित वित्तीय लाभ जल्द जारी किए जाएं।
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 25 अप्रैल 2026 को दिए अपने ऐतिहासिक फैसले में राज्य सरकार द्वारा बनाए गए हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी (भर्ती एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 2024 को असंवैधानिक करार देते हुए पूरी तरह निरस्त कर दिया था। हाईकोर्ट ने इस कानून के आधार पर कर्मचारियों से सेवा लाभ वापस लेने, वरिष्ठता समाप्त करने तथा रिकवरी संबंधी सभी सरकारी आदेश और अस्वीकृति पत्र भी रद्द कर दिए थे। 

Share:
Share:
Comment
Leave A Comment