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SEE Learning स्टेट एसआरजी ग्रुप की तीन दिवसीय वर्कशाप शिमला में शुरू, एक्शन प्लान होगा तैयार



स्कूली बच्चों को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने,  दूसरों के प्रति संवेदनशील बनने, सही निर्णय लेने और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए  SEE Learning (Social, Emotional and Ethical Learning) कार्यक्रम  प्रदेश में लागू किया गया है। समग्र शिक्षा के तहत अभी यह कार्यक्रम कांगड़ा और हमीरपुर के एक सौ स्कूलों में चल रहा है।  इसके लिए स्टेट रिसोर्स ग्रुप (SRG) तैयार किया गया है, जिसकी तीन दिवसीय कैपिसिटी बिल्डिंग (Capacity Building) कार्यशाला हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चर को-ऑपरेटिव स्टाफ ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, सांगटी (समरहिल), शिमला में सोमवार को शुरू हुई।  8 से 10 जून तक आयोजित इस आवासीय (Residential) कार्यशाला में स्टेट रिसोर्स ग्रुप के सदस्य, जिनमें स्कूली शिक्षक, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIETs) के अधिकारी, समग्र शिक्षा के कोर्डिनेटर के अलावा पीरामल फाउंडेशन के अधिकारी मौजूद हैं।
इस कार्यशाला में SEE learning की समग्र शिक्षा कोर्डिनेटर वर्षा सूद और अन्य कोर्डिनेटर डा. मंजुला शर्मा, प्रतिभा बाली, सोनिया शर्मा, अंजना भारद्वाज के अलावा पीरामल फाउंडेशन की वरिष्ठ कार्यक्रम निदेशक जिशान हसन और कार्यक्रम प्रबंधक राजेंद्र ठाकुर,  हीना कालरा, वसीम राजा भट्ट, रईस अहमद सोफी विशेष तौर पर उपस्थित रहे।
इस मौके पर समग्र शिक्षा  की SEE Learning स्टेट कोर्डिनेटर वर्षा सूद ने कहा कि समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा की मार्गदर्शन में हो रही यह कार्यशाला SEE learning कार्यक्रम को प्रदेश में और भी  प्रभावी रूप से  लागू करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला के दौरान प्रतिभागी प्रदेश में SEE Learning कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन, प्रशिक्षक विकास, विद्यालय स्तरीय गतिविधियों तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा करेंगे। इस कार्यक्रम के माध्यम से आने वाले समय में प्रदेश के विद्यार्थियों में भावनात्मक सुदृढ़ता, सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक नेतृत्व क्षमता को विकसित करने पर विशेष बल दिया जाएगा।
डॉ. मंजुला शर्मा ने कहा कि SEE Learning कार्यक्रम की सफलता के लिए सबसे पहले शिक्षकों को स्वयं इसके सिद्धांतों को आत्मसात करना होगा। जब शिक्षक अपने व्यवहार, सोच और भावनात्मक समझ में सकारात्मक परिवर्तन लाएंगे, तभी वे विद्यार्थियों को प्रभावी ढंग से मार्गदर्शन दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि कक्षा में यदि कोई बच्चा तनाव, भय, चिंता या भावनात्मक अस्थिरता से जूझ रहा हो तो उससे संवेदनशीलता और समझदारी के साथ कैसे व्यवहार किया जाए, यह कार्यक्रम उसी दिशा में शिक्षकों को प्रशिक्षित करता है।


बच्चों में कठिन चुनौतियों के लिए आत्मबल विकसित करना बेहद जरूरीः जिशान
इस अवसर पर पीरामल फाउंडेशन की वरिष्ठ कार्यक्रम निदेशक जिशान हसन ने कहा कि SEE Learning  का उद्देश्य केवल शैक्षणिक उपलब्धियां बढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों में लचीलापन (Resilience), करुणा (Compassion) और नैतिक विवेक (Ethical Discernment) विकसित करना है। आज मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं और बच्चों पर शैक्षणिक, पारिवारिक, सामाजिक तथा पारस्परिक संबंधों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। हालांकि अभिभावक और शिक्षक बच्चों को सही दिशा देने का प्रयास कर सकते हैं, लेकिन जीवन में ऐसे क्षण अवश्य आते हैं जब बच्चों को स्वयं निर्णय लेने होते हैं। ऐसे में उनमें सही और गलत के बीच अंतर करने की क्षमता तथा कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मबल विकसित करना बेहद आवश्यक है।
जिशान हसन ने कहा कि SEE Learning भारतीय चिंतन एवं ध्यान परंपराओं (Contemplative Traditions) तथा आधुनिक विज्ञान के समन्वय पर आधारित है। इसमें ध्यान एवं जागरूकता (Attention and Awareness), आत्म एवं पर-करुणा (Compassion), आघात एवं लचीलापन आधारित देखभाल (Trauma and Resilience-Informed Care), प्रणालीगत सोच (Systems Thinking) तथा नैतिक निर्णय क्षमता (Ethical Discernment) जैसे महत्वपूर्ण आयाम शामिल हैं। उन्होंने कहा कि करुणा और सहानुभूति जैसी मानवीय क्षमताओं को सीखने और अभ्यास के माध्यम से विकसित किया जा सकता है। SEE Learning का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में एक ऐसा शिक्षण वातावरण तैयार करना है जो संवेदनशील, सहानुभूतिपूर्ण और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण हो।  इस दौरान SEE learning के राज्य कार्यक्रम प्रबंधक राजेंद्र ठाकुर ने कार्यक्रम पर प्रजेंटेशन दी।


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