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पंचायत चुनाव: डीसी की 5% सीटें आरक्षित करने की शक्तियों पर रोक

 
 
हिमाचल में पंचायत चुनाव में 5 फीसदी की सीटें आरक्षित करने के जिलाधीशों को दिए गए अधिकारों पर रोक लग गई है। प्रदेश सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में पंचायती राज कानून में संशोधन लाकर 5 फीसदी सीटें आरक्षित करने का अधिकार जिलाधीशों को दिया था। इसको लेकर प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिस पर कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाया और इस फैसले पर रोक लगा दी। इस तरह अब सभी जिलों के डीसी को कोर्ट के आदेशों पर अमल करना होगा। यही नहीं सभी जिलाधीशों को कल यानी 7 अप्रैल तक पंचायत चुनाव के लिए हर हाल में आरक्षण रोस्टर भी लगाना होगा।
 
 
हिमाचल सरकार द्वारा जिलाधीशों को दी गई 5 फीसदी सीटें आरक्षित करने की शक्तियों पर रोक लग गई। इन शक्तियों का इस्तेमाल कर यदि कोई आरक्षण रोस्टर जारी किया गया है तो उस पर भी रोक लगा दी है।  इस बीच प्रदेश के 4 जिलों के डीसी ने आज पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर जारी कर दिया है। इनमें कुल्लू, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर जिले शामिल हैं। ताजा आदेशों के बाद यदि किसी डीसी ने 5 फीसदी सीटें नए नियम के तहत आरक्षित की होगी, तो उस सूरत में आरक्षण रोस्टर नए सिरे से तय करना होगा।
इस तरह 4 जिलों में आरक्षण रोस्टर के बाद यह तस्वीर साफ हो गई थी कि कौन सी पंचायत महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, एससी महिला, एसटी महिला, ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुई है। इन जिलों में करीब 44 फीसदी सीटें ओपन रही हैं, जबकि लगभग 56 फीसदी पद आरक्षित हुए हैं, क्योंकि राज्य में महिलाओं के 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है। इस वजह से ओपन पंचायतें कम बचती हैं। लेकिन कोर्ट का आदेश आने के बाद इन जिलों में भी रोस्टर बदल सकता है।
 

 

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