स्कूली शिक्षा में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद का बड़ा योगदान : रोहित ठाकुर
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा है कि राज्य में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने एससीईआरटी के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि यह संस्थान प्रदेश सरकार का एक अहम थिंक टैंक है, जो पाठ्यक्रम निर्धारण के साथ-साथ शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
इस अवसर पर समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ अमरजीत शर्मा, स्कूली शिक्षा निदेशक आशीष कोहली और अतिरिक्त निदेशक बीआर शर्मा, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव मेजर विशाल शर्मा, एससीईआरटी की प्राचार्या ऋतु शर्मा सोनी, हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा परिषद के चेयरपर्सन प्रो. सर्वजोत सिंह बहल , समग्र शिक्षा के विभिन्न कोऑर्डिनेटर, एससीईआरटी के अधिकारी, शिक्षक गण उपस्थित रहे।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि एससीईआरटी और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) लंबे समय तक केवल प्रशासनिक समायोजन के संस्थान माने जाते रहे हैं, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार इन संस्थानों को शिक्षक प्रशिक्षण और अकादमिक नवाचार के सशक्त केंद्रों के रूप में विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा एससीईआरटी और डाइट में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं, ताकि इन्हें आधुनिक शैक्षिक आवश्यकताओं के अनुरूप सक्षम बनाया जा सके।
उन्होंने शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा, एससीईआरटी और डाइट से जुड़े शिक्षकों एवं अधिकारियों का आह्वान किया कि वे बदलते समय और नई शैक्षिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपनी शिक्षण रणनीतियों में निरंतर सुधार करें। शिक्षा मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकें शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से प्रवेश कर रही हैं और इनका उपयोग इस प्रकार किया जाना चाहिए कि शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ हो तथा छात्रों की सीखने की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बने, न कि इन तकनीकों का दुरुपयोग हो।
होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड पर दी गई प्रेजेंटेशन
इस दौरान एससीईआरटी की ओर से सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के समग्र मूल्यांकन के लिए तैयार किए गए होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड को लेकर एक प्रेजेंटेशन दी गई। इस प्रोग्रेस कार्ड में विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति के साथ-साथ खेल, सांस्कृतिक गतिविधियाँ, सामाजिक सहभागिता, व्यवहार, स्वास्थ्य और जीवन कौशल से जुड़े विभिन्न पहलुओं को भी शामिल किया जाएगा। बताया गया कि इस व्यवस्था से शिक्षकों को विद्यार्थियों की प्रतिभा, रुचि और सीखने की आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने में सहायता मिलेगी। विद्यार्थियों से संबंधित महत्वपूर्ण डाटा सुरक्षित रूप से संरक्षित किया जाएगा, जिससे शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
अकादमिक सुदृढ़ीकरण और शिक्षक क्षमता निर्माण पर फोकसः राजेश शर्मा
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि एससीईआरटी और डाइट संस्थानों को राज्य में शिक्षक प्रशिक्षण और अकादमिक सहयोग के सशक्त केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा के तहत पाठ्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन, शिक्षक क्षमता निर्माण तथा विद्यालयों तक नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियाँ पहुंचने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अनुरूप अकादमिक प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने के लिए नियमित समीक्षा, प्रशिक्षण और विभागीय समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड को स्कूली शिक्षा में मूल्यांकन प्रणाली में एक महत्वपूर्ण सुधार बताते हुए कहा कि यह विद्यार्थियों के समग्र विकास को समझने में सहायक होगा और शिक्षकों को उनकी सीखने की आवश्यकताओं के अनुरूप मार्गदर्शन प्रदान करने में मदद करेगा।
लिबरल आर्ट्स की अप्रोच अपनाने पर बल
बैठक में हिमाचल प्रदेश उच्च शिक्षा परिषद के चेयरपर्सन प्रो. सर्वजोत सिंह बहल ने इस समीक्षा बैठक को शिक्षा सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री और विभागीय अधिकारी जिस तरह जमीनी स्तर पर आकर शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं, वह दर्शाता है कि राज्य में शिक्षा सुधार को गंभीरता से लिया जा रहा है।
प्रो. बहल ने कहा कि स्कूली शिक्षा में 11वीं और 12वीं कक्षा के स्तर पर पारंपरिक स्ट्रीम आधारित व्यवस्था के स्थान पर लिबरल आर्ट्स की अप्रोच अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अभी तक स्कूली शिक्षा को मेडिकल, नॉन-मेडिकल, आर्ट्स और कॉमर्स जैसी धाराओं में विभाजित कर दिया जाता है, जिससे छात्रों की रुचियों और क्षमताओं का समग्र विकास सीमित हो जाता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि लिबरल आर्ट्स आधारित दृष्टिकोण अपनाने से छात्र विभिन्न विषयों का अध्ययन कर सकेंगे, उनकी सोच का दायरा व्यापक होगा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में परिकल्पित सर्वांगीण विकास की भावना को बल मिलेगा। इससे छात्र भविष्य की चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम और तैयार हो सकेंगे।
एचपीयू के इतिहास विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर अंजली वर्मा ने स्कूली पाठ्यक्रम में पढ़ाए जा रहे इतिहास में हिमाचल प्रदेश के इतिहास को भी समुचित रूप से शामिल करने का सुझाव दिया। इस प्रस्ताव पर बैठक में उपस्थित पैनल सदस्यों से विचार-विमर्श किया गया तथा उनसे इससे संबंधित सुझाव आमंत्रित किए गए।
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