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हिमाचल में थमे एंबुलेंस के पहिए, निजी गाड़ियों के सहारे मरीज



हिमाचल प्रदेश में एंबुलेंस सेवाएं ठप हो गई हैं। एंबुलेंस कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर 24 घंटे की सांकेतिक हड़ताल पर चले गए हैं। यह हड़ताल बीती रात 8 बजे शुरू हुई थी और आज रात 8 बजे तक जारी रहेगी। इसके चलते प्रदेशभर में मरीजों को अस्पताल पहुंचने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगह मरीजों को एंबुलेंस न मिलने के कारण निजी गाड़ियां किराए पर लेकर अस्पताल पहुंचना पड़ा।
हिमाचल में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल ने मरीजों की परेशानी और बढ़ा दी है। राजधानी शिमला समेत कई जिलों में हड़ताल का सीधा असर देखने को मिला। आईजीएमसी, डीडीयू और केएनएच जैसे बड़े अस्पतालों में भी मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिली और उन्हें मजबूरन निजी गाड़ियों या टैक्सियों का सहारा लेना पड़ा। कई गंभीर मरीज तो रातभर अस्पतालों के बाहर एंबुलेंस का इंतजार करते रहे।
हड़ताल के दौरान एंबुलेंस कर्मचारियों ने शिमला के कसुम्पटी स्थित नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) कार्यालय के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है और मजबूरी में उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।


कर्मचारियों ने दी आंदोलन उग्र करने की चेतावनी

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनसे रोजाना 12-12 घंटे काम लिया जा रहा है, जबकि मानदेय केवल आठ घंटे का ही दिया जा रहा है। उनका कहना है कि अदालतों और श्रम विभाग के आदेशों के बावजूद शोषण जारी है। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि ईपीएफ और ईएसआई के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस मुद्दे पर वे कई बार संबंधित कंपनी और एनएचएम अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन हर बार उनकी मांगों को अनसुना किया गया।
एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के महासचिव बालकराम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस 24 घंटे की सांकेतिक हड़ताल के बाद भी उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और उग्र होगा। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष कर्मचारियों की मजबूरी है, क्योंकि लगातार हो रहे अन्याय और शोषण को अब और बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

 

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